होम-स्कूलिंग से ईजीएमओ गोल्ड तक: श्रेया शांतनु मुंदड़ा ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला स्वर्ण

फ्रांस के बोर्डो में आयोजित 15वीं यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में श्रेया ने 42 में से 35 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। भारत ने 67 देशों में छठा स्थान हासिल कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

नई दिल्ली। भारत की युवा गणित प्रतिभा श्रेया शांतनु मुंदड़ा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच दिया है। फ्रांस के बोर्डो में आयोजित 15वीं यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड (ईजीएमओ) 2026 में श्रेया ने 42 में से 35 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वह इस प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय प्रतिभागी बन गई हैं।

श्रेया की उपलब्धि के साथ भारतीय टीम ने भी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। 67 देशों की भागीदारी वाली इस प्रतियोगिता में भारत ने छठा स्थान हासिल किया, जो ईजीएमओ में देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

दो दिन की कठिन परीक्षा में 35 अंक

ईजीएमओ 2026 का आयोजन फ्रांस के बोर्डो में 9 से 15 अप्रैल 2026 तक किया गया था। प्रतियोगिता में 67 देशों के करीब 260 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रतिभागियों को दो दिन की कठिन गणित परीक्षा से गुजरना पड़ा।

श्रेया ने छह सवालों में क्रमशः 7, 7, 5, 7, 2 और 7 अंक हासिल किए। कुल 35/42 अंक के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले ईजीएमओ में किसी भारतीय प्रतिभागी ने स्वर्ण पदक हासिल नहीं किया था। श्रेया इससे पहले भी ईजीएमओ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।

भारतीय टीम ने जीते तीन पदक

श्रेया के स्वर्ण पदक के अलावा भारतीय टीम के अन्य सदस्यों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। चार सदस्यीय भारतीय दल ने एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया।

भारतीय टीम के पदक विजेता:

  • श्रेया शांतनु मुंदड़ा — स्वर्ण पदक
  • संजना फिलो चाको — रजत पदक
  • शिवानी भरत कुमार — कांस्य पदक
  • श्रीमयी बेरा — मजबूत प्रदर्शन

टीम के इस प्रदर्शन के दम पर भारत 67 देशों में छठे स्थान पर रहा। यह ईजीएमओ में भारत की अब तक की सबसे बड़ी टीम उपलब्धि है।

होम-स्कूलिंग से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर

श्रेया की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी शैक्षणिक यात्रा पारंपरिक स्कूलिंग से शुरू नहीं हुई। उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में होम-स्कूलिंग के जरिए पढ़ाई की। उनके माता-पिता ने शुरुआती दौर में उन्हें और उनके भाई को घर पर ही शिक्षा दी।

2023 में प्रकाशित उनकी प्रोफाइल में उन्हें 13 वर्षीय होम-स्कूली छात्रा के रूप में बताया गया था। बाद में उनका परिवार पुणे चला गया और श्रेया ने एनआईओएस के माध्यम से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा दी।

इसके बाद उन्होंने नियमित कॉलेज शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। वर्तमान में श्रेया पुणे के महावीर जूनियर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा हैं।

होम-स्कूलिंग से शुरू होकर एनआईओएस और फिर कॉलेज शिक्षा तक पहुंचने के बाद अंतरराष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता में भारत का पहला ईजीएमओ स्वर्ण जीतना उनकी शैक्षणिक यात्रा को खास बनाता है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

श्रेया की कहानी का एक और पहलू इसे प्रेरणादायक बनाता है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उनकी शुरुआती परवरिश का कुछ समय मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र कोंडा-देवरी में भी बीता। इसके बाद परिवार पुणे चला गया और उन्होंने वहीं आगे की शिक्षा जारी रखी।

उनकी यात्रा बताती है कि किसी विद्यार्थी की सफलता केवल पारंपरिक स्कूलिंग या बड़े शहर में मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर नहीं होती। मेहनत, सही मार्गदर्शन और अपनी रुचि के क्षेत्र में लगातार अभ्यास के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

एचबीसीएसई-टीआईएफआर से मिली ओलंपियाड की तैयारी

श्रेया ने गणितीय ओलंपियाड की तैयारी के लिए होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (एचबीसीएसई-टीआईएफआर) की चयन और प्रशिक्षण प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इस प्रक्रिया के माध्यम से देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय गणित प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाता है।

कठिन गणितीय समस्याओं को हल करने की क्षमता, नियमित अभ्यास और गणित के प्रति गहरी रुचि ने श्रेया को इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लड़कियों के लिए खास गणित प्रतियोगिता

यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय गणित प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर की स्कूली छात्राओं को गणित में रुचि लेने, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और विज्ञान एवं गणित के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।

भारत वर्ष 2015 से इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है। ऐसे में 2026 में श्रेया का स्वर्ण पदक देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है।

भारत के लिए क्यों खास है श्रेया की जीत?

श्रेया का स्वर्ण पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह भारत में लड़कियों के बीच गणितीय प्रतिभा को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय गणित प्रतियोगिताओं में भारतीय छात्राओं की बढ़ती मौजूदगी को भी दर्शाता है।

एक तरफ जहां श्रेया ने भारत के लिए ईजीएमओ का पहला स्वर्ण हासिल किया, वहीं पूरी भारतीय टीम ने 67 देशों में छठा स्थान हासिल कर देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। होम-स्कूलिंग से शुरू हुआ श्रेया का सफर अब भारत के गणितीय इतिहास में एक यादगार उपलब्धि के रूप में दर्ज हो चुका है।

Related posts

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ‘हरेली बर्ड फेस्टिवल 2026’ का सफल समापन

​रायपुर : वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने यूसीसी समिति सदस्यों से की सौजन्य मुलाकात

रायपुर : संस्कृति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित