दृष्टिहीनता को मात देकर जज बनीं तान्या नेथन, मां का हाथ थामकर कोर्ट पहुंचने की कहानी प्रेरणादायक

नई दिल्ली। तान्या नेथन ने अपनी दृष्टिबाधिता को कमजोरी नहीं, बल्कि अपने सपनों की राह में एक चुनौती के रूप में देखा। कानून की पढ़ाई पूरी कर न्यायिक क्षेत्र में कदम रखने वाली तान्या की कहानी आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी शारीरिक चुनौती के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।

तान्या की खासियत यह है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान वह तकनीक और ब्रेल की मदद लेती हैं। सुनवाई से जुड़ी जरूरी जानकारियां और नोट्स वह ब्रेल में दर्ज करती हैं, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।

उनके लिए कोर्ट तक का सफर भी बेहद भावुक और प्रेरणादायक है। कई मौकों पर उनकी मां उनका हाथ पकड़कर उन्हें कोर्ट से बाहर ले जाती दिखाई देती हैं। मां का यह साथ तान्या की संघर्ष यात्रा का अहम हिस्सा रहा है।

तान्या ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और कानून के प्रति समर्पण से यह साबित किया है कि न्याय की समझ केवल आंखों से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, विवेक और ज्ञान से भी होती है। उनकी कहानी समाज में दिव्यांगजनों की क्षमताओं को लेकर बनी धारणाओं को चुनौती देती है और समान अवसरों की जरूरत को रेखांकित करती है।

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