अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध वाले कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे उन्हें रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। भारत भी इन देशों में शामिल है।
क्या है यह नया कानून?
इसका नाम “लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” है। यह रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों को निशाने पर लेता है: चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान। अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इसे 86-11 के वोट से पास किया था। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस सूची की समीक्षा करेंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह कानून 30 दिन बाद लागू होगा। यह टैरिफ का अधिकार देता है, अपने आप टैरिफ नहीं लगाता। [US 100% Tariff Impact: ट्रंप ने कर दिए साइन… अब भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानिए क्या होगा असर
भारत का रुख
भारत ने साफ कहा है कि देश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
तेल का गणित
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 40% से ज्यादा रूस से खरीदता है। अगस्त 2026 में यह करीब 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि जुलाई में 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन था। रूसी तेल छोड़कर दूसरे देशों से खरीदना महंगा पड़ सकता है। इससे आयात बिल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने का खतरा है।
निर्यात पर असर
अभी अमेरिका में भारतीय सामान पर टैरिफ 10% है। 100% होने पर भारतीय उत्पाद अमेरिका में बहुत महंगे हो जाएंगे। टेक्सटाइल, फार्मा, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और केमिकल्स के ऑर्डर घटने का डर है। खरीदार बांग्लादेश या वियतनाम जैसे सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं
अगस्त 2026 में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.83% बढ़कर 8.4 अरब डॉलर रहा। अमेरिका से आयात 65.78% बढ़कर 5.97 अरब डॉलर हो गया। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 50% टैरिफ के दौरान मासिक निर्यात औसतन 6.5 अरब डॉलर पर आ गया था। यानी ऊंचा टैरिफ पहले भी भारतीय निर्यात को नुकसान पहुंचा चुका है।
आगे क्या?
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब नजर इस पर है कि ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं या नहीं।