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69 हजार शिक्षक भर्ती का “एक अंक विवाद”: हाईकोर्ट में सरकार का जवाबी हलफनामा दाखिल, 19 नवंबर को अगली सुनवाई…

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े चर्चित "एक अंक विवाद" में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रख दिया है।

by desk

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े चर्चित “एक अंक विवाद” में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रख दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बृहस्पतिवार को जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने याचियों के वकील को इसका प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय की है।

किसने दी थी याचिका

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने रामजी मिश्र समेत 12 अभ्यर्थियों की याचिका पर यह आदेश दिया। यह याचिका रिट-ए संख्या 8761/2026 के रूप में दर्ज है।

याचियों की दलील

याचियों का कहना है कि इस मामले में 2,249 अभ्यर्थियों में से मेरिट के हिसाब से चयन होना था, फिर भी 7 मई 2026 को सिर्फ एक अभ्यर्थी विवेक कुमार सिंह को नौकरी दी गई। इससे पहले कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिवक्ता से स्पष्ट निर्देश मांगे थे कि याचियों को वह लाभ क्यों नहीं मिल रहा, जो 7 मई 2026 के आदेश से विवेक कुमार सिंह को दिया गया। उस सुनवाई की अगली तारीख 22 सितंबर थी।

अभ्यर्थियों का धरना

सितंबर में अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर धरना भी दिया था। धरने पर बैठे सूरज वर्मा का कहना था कि केवल एक व्यक्ति को नौकरी देने से संविधान में दिए समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है और एक अंक से वंचित हजारों अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनकी योग्यता मौजूद है।

मामले की पृष्ठभूमि

परिषदीय विद्यालयों की 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा 6 जनवरी 2019 को हुई थी। प्रश्न पत्र के कुछ विवादित प्रश्नों के उत्तर से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला

भर्ती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से चयन सूची और अभ्यर्थियों का पूरा ब्योरा मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि अगर लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले के बाद चयन सूची दोबारा बनती है, तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को शामिल करने पर भी विचार होगा। साथ ही पहले से चयनित शिक्षकों को तुरंत बाहर नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी पूछा कि गलत प्रश्न के कारण एक अंक का लाभ सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों को ही क्यों मिला। सरकार ने अदालत को बताया कि करीब 40 हजार अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में और करीब 36 हजार आरक्षित वर्ग में हैं।

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