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सिपाही भर्ती 2025: “नाम-टाइटल से जाति तय न करें”, भर्ती बोर्ड की चेतावनी; अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई…

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती 2025 के नतीजों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर सख्त रुख अपनाया है।

by desk

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती 2025 के नतीजों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड ने कहा है कि केवल नाम, उपनाम या जाति से जुड़े टाइटल के आधार पर किसी की जाति या आरक्षण श्रेणी तय नहीं की जाती।

विवाद की शुरुआत

बोर्ड ने 14 अक्टूबर 2026 को सिपाही भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया था, जिसमें 32 हजार से ज्यादा पदों के लिए सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट आई। रिजल्ट के बाद ईडब्ल्यूएस श्रेणी की मेरिट लिस्ट में एक अभ्यर्थी के चयन को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे, जिसका आधार उसके नाम और टाइटल को बनाया गया। यहां उस अभ्यर्थी का नाम जानबूझकर नहीं दिया जा रहा है।

बोर्ड का स्पष्टीकरण

बोर्ड ने बताया कि अभ्यर्थी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और निर्धारित प्रारूप के प्रमाण पत्र जमा करते हैं, और आरक्षण नियमों के अनुसार ही चयन का फैसला होता है। इस भर्ती के नतीजे में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है। बोर्ड के मुताबिक केवल नाम देखकर किसी उम्मीदवार के चयन या पात्रता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उसने लोगों से अपील की कि पूरी जानकारी के बिना किसी अभ्यर्थी के बारे में गलत बातें न फैलाएं।

कार्रवाई की चेतावनी

बोर्ड ने चेतावनी दी कि अफवाह फैलाना दंडनीय अपराध है और ऐसे लोगों व सोशल मीडिया हैंडलों पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पिछली परीक्षा के दौरान की कार्रवाई

सिपाही भर्ती परीक्षा 2025 के संचालन के दौरान 28,86,798 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। भर्ती बोर्ड ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग समेत तकनीकी निगरानी के जरिए नकल, प्रतिरूपण और अफवाह फैलाने के प्रयासों पर अंकुश लगाया। बोर्ड के अनुसार परीक्षा से जुड़े कुल 12 अभियोग दर्ज हुए और 9 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर पर मिली शिकायतों के आधार पर भ्रामक वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।

पहले भी जारी हुआ था ऐसा स्पष्टीकरण

इससे पहले भी बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि सरनेम या टाइटल के आधार पर किसी अभ्यर्थी की जाति तय नहीं होती। नियुक्ति पत्र देने से पहले नियुक्ति जिले के पुलिस अधीक्षक चयनित अभ्यर्थियों का दोबारा सत्यापन भी कराते हैं।

नाम पर शक के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले प्रमाण पत्रों की वैधता ही असली पैमाना है। इस मामले में बोर्ड की आधिकारिक कार्रवाई या जांच की कोई और जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।

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