महिलाओं में माइग्रेन का खतरा क्यों ज्यादा? हार्मोनल बदलाव हो सकता है बड़ी वजह

नई दिल्ली। तेज सिरदर्द, रोशनी या आवाज से परेशानी और कभी-कभी जी मिचलाने जैसी समस्याओं वाला माइग्रेन पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, माइग्रेन केवल महिलाओं की बीमारी नहीं है और पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव बड़ी वजह

महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा होने की प्रमुख वजहों में Estrogen hormone में होने वाले बदलाव को माना जाता है। खासकर मासिक धर्म के आसपास estrogen के स्तर में बदलाव कुछ महिलाओं में migraine attack को trigger कर सकता है।

इसी वजह से कुछ महिलाओं को पीरियड्स से पहले या उसके दौरान बार-बार सिरदर्द की समस्या हो सकती है।

Pregnancy और Menopause का भी असर

गर्भावस्था के दौरान hormones में बड़े बदलाव होते हैं। कुछ महिलाओं में इस दौरान migraine कम हो सकता है, जबकि कुछ में बना रह सकता है या अलग तरह से दिखाई दे सकता है।

वहीं menopause के आसपास estrogen में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ महिलाओं में migraine की समस्या अस्थायी रूप से बढ़ सकती है।

केवल Hormones ही जिम्मेदार नहीं

माइग्रेन के पीछे कई अन्य triggers भी हो सकते हैं, जैसे तनाव, नींद की कमी, तेज रोशनी, तेज आवाज, dehydration, खाना छोड़ना और कुछ लोगों में विशेष foods।

हर व्यक्ति के triggers अलग हो सकते हैं, इसलिए बार-बार migraine होने पर उसके pattern को पहचानना उपयोगी हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है, पहले से ज्यादा गंभीर हो गया है या अचानक बहुत तेज सिरदर्द शुरू हुआ है, तो medical evaluation जरूरी है। अचानक जीवन का सबसे तेज सिरदर्द, कमजोरी/सुन्नपन, बोलने में परेशानी, बेहोशी या दृष्टि में गंभीर बदलाव जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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