गुड टच बैड टच नहीं, अब बच्चों को सिखाएं सेफ टच अवेयरनेस

नो गुड टच

आज तक हम बच्चों को स्कूलों में सिखाते हैं “गुड टच” और “बैड टच” के बारे में. आजकल आती हुई खबरें, जहाँ छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म होते हैं, सिर्फ लड़कियाँ ही नहीं लड़के भी इसका शिकार होते हैं. अक्सर देखा गया है ऐसा कृत्य करने वाले जान-पहचान वाले, रिश्तेदार, पड़ोसी, चौकीदार, ऑटोवाले या दुकानदार, जहाँ बच्चे इनके संपर्क में आते रहते हैं, वैसे लोग होते हैं.

अब वक्त आ गया है बच्चों को बताने का कि “अच्छा स्पर्श” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। मेरी सभी माता-पिता से विनती है कि अपने बच्चों से जुड़ी असावधानी महँगी पड़ सकती है, कुछ बातें हमेशा याद रखें:

  1. बच्चे को कभी अकेला न छोड़ें.

  2. बच्चे दूसरों के घर खेलने जाएँ तो आपको पता होना चाहिए कि उस घर के माता-पिता आपके बच्चे पर नज़र रख रहे हैं या नहीं.

  3. पार्क में बच्चे खेल रहे हों तो उनका ध्यान रखने वाला कोई न कोई ज़रूर होना चाहिए.

  4. कोई चॉकलेट या अन्य चीज़ों का प्रलोभन दे, तो वह बिल्कुल न खाएँ.

  5. उनके साथ हो रही हर छोटी बात वे आपसे शेयर करें, इतना विश्वास उनमें जगाएँ.

  6. स्कूल में उनके शिक्षकों से भी आप लगातार बातचीत बनाए रखें.

  7. सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बच्चा आपसे हर विषय पर खुलकर बात कर सके, ऐसा विश्वास उसमें जगाएँ.

हमारा उद्देश्य बच्चों से उनका बचपन छीनना नहीं है, बल्कि उनके बचपन को सँभालना और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रखना है.

– संध्या किरोलिकार, सोशल वर्कर, भंडारा, महाराष्ट्र

 

अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं। इससे सहमत या असहमत होना पाठकों का व्यक्तिगत अधिकार है। यह लेख जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है, यह किसी भी प्रकार की पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।

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