Brain Aging Research: उम्र बढ़ने पर दिमाग में पहुंचती हैं बोन मैरो की इम्यून कोशिकाएं, Alzheimer’s पर नई रिसर्च…

नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर में सिर्फ त्वचा, मांसपेशियों और हड्डियों में ही बदलाव नहीं होता, बल्कि दिमाग की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी brain immune system में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। वैज्ञानिकों ने अब इंसानी दिमाग में होने वाले ऐसे ही बदलाव को लेकर एक अहम सुराग खोजा है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा प्रकाशित शोध रिपोर्ट के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ बोन मैरो से बनने वाली immune cells दिमाग में पहुंचती हैं और वहां मौजूद microglia जैसी कोशिकाओं की आबादी में योगदान करती हैं।

यह अध्ययन Stanford University के शोधकर्ताओं की टीम ने किया और इसके निष्कर्ष 30 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Nature में प्रकाशित हुए। शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क में इन कोशिकाओं की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए आनुवंशिक बदलावों को एक तरह के प्राकृतिक ‘ट्रैकर’ की तरह इस्तेमाल किया।

दिमाग की ‘सिक्योरिटी टीम’ होती हैं Microglia

हमारे दिमाग में microglia नाम की विशेष immune cells होती हैं। इन्हें मस्तिष्क की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ये कोशिकाएं संक्रमण, चोट या अन्य खतरों के प्रति प्रतिक्रिया करती हैं और दिमाग के वातावरण को संतुलित रखने में भूमिका निभाती हैं।

लंबे समय से वैज्ञानिकों का मानना रहा है कि इंसानी दिमाग में मौजूद microglia मुख्य रूप से दिमाग के अंदर ही बनी और बनी रहती हैं। चूहों में भी शुरुआती विकास के दौरान microglia दिमाग में पहुंचती हैं और बाद में स्थानीय स्तर पर अपनी संख्या बनाए रख सकती हैं।

लेकिन इंसानों में तस्वीर कुछ अलग हो सकती है। नई रिसर्च से संकेत मिला है कि उम्र बढ़ने के दौरान बोन मैरो से बनने वाली कोशिकाएं भी दिमाग में पहुंचकर microglia की आबादी में शामिल हो सकती हैं। (

वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया पता?

इस रिसर्च की खास बात इसका तरीका है। बोन मैरो में मौजूद stem cells समय के साथ कुछ आनुवंशिक mutations हासिल कर सकती हैं। जब ऐसी stem cells तेजी से बढ़ती हैं, तो उनसे बनने वाली blood और immune cells में भी वही mutations दिखाई दे सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इसी प्रक्रिया, जिसे clonal hematopoiesis कहा जाता है, को प्राकृतिक पहचान चिह्न की तरह इस्तेमाल किया।

शोधकर्ताओं ने 20 बुजुर्ग लोगों के postmortem brain tissue की जांच की। उन्हें दिमाग में ऐसी कोशिकाएं मिलीं जिनमें वही mutations मौजूद थे जो उन लोगों के blood cells में पाए गए थे। इससे मजबूत सबूत मिला कि ये brain cells bone marrow से उत्पन्न हुई थीं। (

उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती गई ऐसी कोशिकाओं की संख्या

रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। बुजुर्ग लोगों के brain tissue में bone-marrow-derived microglia जैसी कोशिकाओं की संख्या युवा लोगों की तुलना में अधिक थी।

इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि यह प्रक्रिया अचानक नहीं होती, बल्कि जीवन के दौरान धीरे-धीरे बढ़ सकती है।

शोधकर्ताओं ने एक ऐसे व्यक्ति के brain tissue और blood का भी अध्ययन किया था, जिसका bone marrow transplant हुआ था। उसके दिमाग में ऐसी microglia जैसी कोशिकाएं मिलीं जिनमें transplant किए गए marrow cells से जुड़े वही mutations मौजूद थे। यह observation इस निष्कर्ष को और मजबूत करता है कि peripheral blood और bone marrow से उत्पन्न कोशिकाएं मानव brain तक पहुंच सकती हैं।

क्या इसका संबंध Alzheimer’s से भी है?

यहीं से इस रिसर्च का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है। वैज्ञानिकों ने यह भी जांचा कि clonal hematopoiesis और Alzheimer’s disease के खतरे के बीच कोई संबंध है या नहीं।

दसियों हजार लोगों के DNA data के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने पाया कि clonal hematopoiesis के अधिकांश प्रकार Alzheimer’s disease के कम जोखिम से जुड़े थे। हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि bone marrow की ये कोशिकाएं Alzheimer’s को रोकती हैं या इसका इलाज करती हैं। यह अभी एक वैज्ञानिक association है और इसके पीछे का कारण समझने के लिए आगे और research की जरूरत है।

भविष्य में दिमाग तक पहुंच सकती हैं नई therapies

इस खोज का सबसे बड़ा महत्व भविष्य के इलाज से जुड़ा है। दिमाग को blood-brain barrier नाम की एक मजबूत जैविक सुरक्षा प्रणाली घेरती है, जिसकी वजह से कई दवाओं और therapeutic molecules का brain तक पहुंचना मुश्किल होता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर bone marrow से निकलने वाली immune cells प्राकृतिक रूप से brain तक पहुंच सकती हैं, तो भविष्य में वैज्ञानिक ऐसी cells को therapeutic molecules पहुंचाने के लिए engineer करने की संभावनाओं पर काम कर सकते हैं। (

इससे Alzheimer’s, Parkinson’s और दूसरी neurological diseases के लिए नई treatment strategies विकसित करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि अभी यह भविष्य की संभावित दिशा है, कोई स्थापित इलाज नहीं।

क्या इससे इंसानों में बुढ़ापा रुक जाएगा?

नहीं। इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि वैज्ञानिकों ने aging रोकने या दिमाग को फिर से जवान बनाने का तरीका खोज लिया है।

यह खोज मुख्य रूप से यह समझने में मदद करती है कि उम्र बढ़ने के साथ brain immune system कैसे बदलता है। यही समझ भविष्य में उम्र से जुड़ी neurological diseases की रोकथाम और उपचार के नए तरीके विकसित करने में उपयोगी हो सकती है। (

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

अब तक brain और immune system को काफी हद तक अलग-अलग systems के रूप में देखा जाता रहा है। नई रिसर्च बताती है कि उम्र बढ़ने के दौरान दोनों के बीच संबंध और अधिक गतिशील हो सकता है।

यदि वैज्ञानिक यह समझने में सफल होते हैं कि bone marrow से आने वाली ये cells brain में कैसे पहुंचती हैं, वहां क्या करती हैं और Alzheimer’s या दूसरी neurological diseases पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है, तो भविष्य में cell-based therapies और targeted treatments के नए रास्ते खुल सकते हैं।

फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए अगला बड़ा सवाल यही है कि ये bone-marrow-derived cells दिमाग में पहुंचने के बाद वास्तव में क्या भूमिका निभाती हैं—क्या वे brain की सुरक्षा में मदद करती हैं, inflammation को प्रभावित करती हैं या कुछ परिस्थितियों में बीमारी के जोखिम को बदलती हैं। इसका जवाब आगे की रिसर्च से मिलने की उम्मीद है।

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