छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम से जुड़े एक मामले में विवाहित बेटी की आश्रित के रूप में पात्रता पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है
कोर्ट ने कहा कि केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर किसी विवाहित बेटी को कानून के तहत आश्रित नहीं माना जा सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित आश्रित होने की शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला एक कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाली क्षतिपूर्ति से जुड़ा था। मामले में 6 लाख 12 हजार 360 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट ने मामले में विवाहित बेटी की आश्रित की स्थिति पर विचार किया और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर क्षतिपूर्ति के दावे को देखा।
किस आधार पर आया फैसला
कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि कर्मचारी की विवाहित बेटी को Employees’ Compensation Act, 1923 की धारा 2(1)(d) के तहत आश्रित माना जा सकता है या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने कानून में दी गई आश्रित की परिभाषा और आर्थिक निर्भरता से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया।
आर्थिक निर्भरता बनी अहम बात
इस फैसले में केवल बेटी का रिश्ता ही आधार नहीं माना गया। क्षतिपूर्ति कानून के तहत आश्रित की पात्रता निर्धारित करने में यह देखा जाता है कि संबंधित व्यक्ति मृत कर्मचारी पर कानून के अनुसार आर्थिक रूप से निर्भर था या नहीं। इसी कानूनी स्थिति के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले में पहले दिए गए क्षतिपूर्ति आदेश को रद्द किया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
यह फैसला कर्मचारी क्षतिपूर्ति कानून के तहत आश्रित की कानूनी परिभाषा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में विवाहित बेटी का दावा स्वतः समाप्त हो जाता है। किसी मामले में अधिकार संबंधित कानून, परिस्थितियों और वास्तविक आर्थिक निर्भरता के आधार पर तय हो सकते हैं।