छत्तीसगढ़ अपने खनिज संसाधनों का इस्तेमाल केवल खनन तक सीमित रखने के बजाय उनसे जुड़े उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग को राज्य में बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में खनिजों की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया है। इसके तहत खनिजों की खोज, खनन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और आगे की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को राज्य के भीतर बढ़ाने की योजना है।
खनिज संपदा का राज्य में ही होगा अधिक उपयोग
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। सरकार की योजना है कि यहां से निकलने वाले खनिजों का अधिक से अधिक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन राज्य में ही हो। इससे खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भी फोकस
राज्य में क्रिटिकल और रणनीतिक खनिजों की संभावनाओं को देखते हुए सरकार इस क्षेत्र पर भी ध्यान दे रही है। केंद्र की खनिज नीलामी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक शामिल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इन संसाधनों को औद्योगिक विकास और मूल्यवर्धन से जोड़ना है।
खनन से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
नई रणनीति का प्रमुख हिस्सा खनन के बाद होने वाली गतिविधियों को राज्य में बढ़ाना है। यानी कच्चे खनिज को बाहर भेजने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग और उससे जुड़े उत्पादों का निर्माण करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे राज्य में खनिज आधारित औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की संभावना है।
रोजगार और उद्योग के लिए बन सकते हैं नए अवसर
खनिज आधारित उद्योगों में प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से निवेश, औद्योगिक इकाइयों और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निवेश पर निर्भर करेगा।