साइबर जागृति अभियान के तहत एडिशनल डीसीपी राहुल देव शर्मा ने विद्यार्थियों और स्टाफ को बताए ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के तरीके, OTP-PIN साझा न करने की दी सलाह
रायपुर, 22 सितंबर 2026। साइबर अपराध लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहे हैं। कभी पुलिस अधिकारी बनकर “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया जाता है तो कभी फर्जी KYC, नौकरी, ऑनलाइन शॉपिंग और APK फाइल के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता है। इसी बढ़ते साइबर खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” के तहत छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल में डिजिटल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में एडिशनल डीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा ने विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को साइबर अपराधों के नए तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम से 150 से अधिक विद्यार्थी और स्टाफ लाभान्वित हुए।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा जोर डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर दिया गया। बताया गया कि साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, नारकोटिक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं।
इसके बाद सामने वाले व्यक्ति को किसी अपराध में फंसने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में घबराकर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। परिवार के लोगों से बात कर संबंधित विभाग या पुलिस से आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी किसी को न दें
विद्यार्थियों और स्टाफ को बताया गया कि OTP, ATM PIN, CVV, UPI PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
खास तौर पर यह समझाया गया कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान करने के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए किसी व्यक्ति के कहने पर पैसे प्राप्त करने के नाम पर UPI PIN डालना खतरे का संकेत हो सकता है।
साथ ही अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई।
फर्जी APK से मोबाइल को हो सकता है खतरा
साइबर ठग कई बार मोबाइल पर APK फाइल भेजकर उसे डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। इसके पीछे KYC अपडेट, इनाम, नौकरी, बैंक अकाउंट या किसी ऑफर का बहाना बनाया जा सकता है।
पुलिस ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK या संदिग्ध ऐप को डाउनलोड न करें। ऐसी फाइलें मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग का जोखिम पैदा कर सकती हैं।
सोशल मीडिया पर भी रखें सावधानी
कार्यक्रम में सोशल मीडिया सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने तथा जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां Two-Factor Authentication यानी 2FA चालू करने की सलाह दी गई।
पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर घर का पता, मोबाइल नंबर, स्कूल से जुड़ी जानकारी, यात्रा की जानकारी और निजी दस्तावेज जैसी संवेदनशील चीजें सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए।
अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने और उनसे निजी फोटो या वीडियो साझा करने में भी सावधानी बरतने को कहा गया।
हर वायरल मैसेज सच नहीं होता
सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली फर्जी खबरों, एडिटेड वीडियो और अफवाहों से भी विद्यार्थियों को सावधान किया गया।
पुलिस ने कहा कि किसी भी मैसेज या वीडियो को बिना सत्यापन के आगे फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। एक गलत जानकारी को शेयर करने से वह कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है।
इन 5 तरह के फ्रॉड से भी बचने की सलाह
कार्यक्रम में साइबर ठगी के कई सामान्य तरीकों को उदाहरण के साथ समझाया गया।
रोमांस स्कैम: ऑनलाइन दोस्ती कर विश्वास जीतना और बाद में किसी बहाने पैसे मांगना।
जॉब फ्रॉड: घर बैठे नौकरी या पार्ट-टाइम काम का लालच देकर रजिस्ट्रेशन फीस या सिक्योरिटी मनी लेना।
ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड: बेहद सस्ता सामान देने के नाम पर फर्जी वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज के जरिए पैसे या बैंकिंग जानकारी हासिल करना।
फिशिंग फ्रॉड: बैंक या किसी विश्वसनीय संस्था के नाम पर फर्जी SMS, ई-मेल या लिंक भेजकर OTP, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करना।
फर्जी KYC फ्रॉड: मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर फर्जी लिंक पर क्लिक करवाना और निजी या बैंकिंग जानकारी हासिल करना।
ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत
पुलिस ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए।
ठगी की जानकारी जितनी जल्दी दी जाती है, संबंधित वित्तीय लेन-देन पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ को “जागरूक रहें, सतर्क रहें और सुरक्षित रहें” का संदेश दिया गया और सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम में प्र. उप निरीक्षक वर्चस्व उपाध्याय, स्कूल के प्राचार्य राकेश चतुर्वेदी, संचालक गौरव खोसला, रितु सिंह, निधि बिसेन, पूनमजीत कौर सहित 150 से अधिक विद्यार्थी और स्टाफ मौजूद रहे।