नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में इस समय सीजनल फ्लू और H1N1 इंफ्लुएंजा के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में संक्रमण के मामलों में तेजी दर्ज की गई है। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने लोगों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा संक्रमण मौसमी इन्फ्लुएंजा से जुड़ा है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली में H1N1 के 1777 मामले
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल 20 अगस्त तक 1,777 H1N1 संक्रमण दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी। H1N1 के साथ-साथ दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-A के कुल मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों को फ्लू और संभावित जटिलताओं से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बेंगलुरु में भी फ्लू के 2 हजार से ज्यादा मामले
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी इस साल फ्लू संक्रमण तेजी से बढ़ा है। 22 अगस्त तक शहर में 2,070 लैब-कन्फर्म्ड इन्फ्लुएंजा केस दर्ज किए गए। यह संख्या 2025 में पूरे साल दर्ज मामलों के 80 प्रतिशत से अधिक है। कर्नाटक में कुल H1N1 मामलों की संख्या 4,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है और राज्य सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है।
क्या भारत में H1N1 का नया वायरस आया है?
बढ़ते मामलों के बीच सोशल मीडिया पर नए या ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन ICMR ने साफ किया है कि भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है।
ICMR से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में भारत में घूम रहा H1N1 वायरस पहले से ज्ञात वायरस का हिस्सा है और 2025 से इसके समान स्ट्रेन का सर्कुलेशन देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि वर्तमान वायरस उत्तरी गोलार्ध के लिए अनुशंसित फ्लू वैक्सीन स्ट्रेन से मेल खाता है।
H1N1 के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
H1N1 के लक्षण कई बार सामान्य वायरल या फ्लू जैसे ही दिखाई देते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अचानक बुखार आना
- खांसी और गले में खराश
- सिरदर्द
- शरीर में दर्द
- अत्यधिक थकान
- नाक बहना या बंद होना
- कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी
ज्यादातर लोगों में मौसमी इन्फ्लुएंजा उचित आराम और देखभाल के साथ ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर तेज बुखार लंबे समय तक बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या हालत तेजी से बिगड़ रही हो तो डॉक्टर से समय पर सलाह लेना जरूरी है।
H1N1 से बचने के लिए क्या करें?
फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल, हाथों की नियमित सफाई और बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचना संक्रमण का जोखिम कम कर सकता है।
खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को ढंकना भी जरूरी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले।
घबराने की नहीं, सावधानी की जरूरत
भारत में H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी निश्चित रूप से स्वास्थ्य विभागों के लिए निगरानी का विषय है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे किसी नए या अधिक खतरनाक वायरस के रूप में नहीं देखा जा रहा है। ICMR ने भी लोगों से घबराने के बजाय सामान्य सावधानी बरतने की अपील की है।
इसलिए बुखार, खांसी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण होने पर इसे केवल सामान्य वायरल मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।