झारखंड छात्र आंदोलन में बड़ा मोड़: JSSC-CGL समेत 14 परीक्षाएं रद्द, 16 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा अनशन

17 अगस्त 2026 को झारखंड सरकार ने TDPL के जरिए आयोजित JSSC-CGL समेत 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। इसके अगले दिन 18 अगस्त को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों से जारी भूख हड़ताल खत्म कर दी। हालांकि, छात्र अब भी CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग पर कायम हैं।

रांची, 18 अगस्त 2026। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 24 दिनों से जारी आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने 17 अगस्त 2026 को बड़ा फैसला लेते हुए टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित JSSC-CGL समेत 14 परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की।

सरकार के इस फैसले के बाद 18 अगस्त 2026 को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अनशन खत्म हुआ है, लेकिन छात्रों की लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

17 अगस्त को सरकार ने लिया बड़ा फैसला

झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को टीडीपीएल के जरिए आयोजित भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों पर उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित धांधली की जांच की मांग कर रहे थे।

18 अगस्त को देवेंद्र महतो ने खत्म किया अनशन

सरकारी फैसले के बाद 18 अगस्त 2026 को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन तोड़ दिया। वह लगातार 16 दिनों से भूख हड़ताल पर थे।

अनशन समाप्त करने के बाद उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों की बाकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था शामिल है।

CBI जांच की मांग अभी बाकी

परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्रों की CBI जांच की मांग पूरी नहीं हुई है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की गहराई से जांच हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे।

चयनित अभ्यर्थियों के सामने भी संकट

सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है, जो JSSC-CGL समेत संबंधित परीक्षाओं में सफल होकर चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके थे।

इन अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर पूरी परीक्षा रद्द कर दी जाती है तो उनकी मेहनत और भविष्य पर असर पड़ेगा। ऐसे अभ्यर्थियों की ओर से भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और उनके हितों को ध्यान में रखने की मांग उठ रही है।

24 दिनों से चल रहा था छात्र आंदोलन

झारखंड में छात्रों का यह आंदोलन करीब 24 दिनों से जारी था। भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्रों ने आंदोलन शुरू किया था।

मामला बढ़ने के बाद छात्र नेता देवेंद्र महतो ने भूख हड़ताल शुरू की। 16 दिन तक चले अनशन के बाद सरकार के 17 अगस्त के फैसले से आंदोलन में बड़ा बदलाव आया।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार के फैसले के बाद देवेंद्र महतो ने अनशन खत्म कर दिया है, लेकिन छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। अब नजर इस बात पर है कि CBI जांच की मांग पर सरकार क्या रुख अपनाती है और रद्द की गई परीक्षाओं को लेकर आगे क्या व्यवस्था बनाई जाती है।

इस पूरे मामले में एक तरफ आंदोलनकारी छात्रों को परीक्षा रद्द होने से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ पहले से चयनित अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में सरकार के सामने छात्रों और चयनित अभ्यर्थियों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।

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