इंडस्ट्रियल मार्केटप्लेस Pneucons ने 10 अक्टूबर से अपने ऑर्डर पर UPI भुगतान बंद करने का फ़ैसला किया है। यह फ़ैसला उस नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ढाँचे से पहले आया है, जो 15 अक्टूबर से लागू होगा।
कंपनी का तर्क
कंपनी के सह-संस्थापक प्रितेश लखानी के मुताबिक़ कंपनी किसी ऑर्डर पर टैक्स से पहले क़रीब 0.5% कमीशन कमाती है। ऐसे में अगर ऑर्डर की रक़म का बड़ा हिस्सा UPI MDR में चला जाता है, तो उस पेमेंट को स्वीकार करना कंपनी के लिए महँगा पड़ सकता है।
कंपनी का उदाहरण
मान लीजिए कोई ग्राहक ₹10,000 का सामान ख़रीदता है। कंपनी का 0.5% कमीशन ₹50 बनता है। 18% GST जोड़ने के बाद ग्राहक कुल ₹11,800 चुकाता है। 0.4% MDR के हिसाब से इस रक़म पर क़रीब ₹47.20 का शुल्क बनता है। यानी ₹50 के कमीशन में से लगभग ₹47.20 MDR में चले जाते हैं। कंपनी के मुताबिक़ इससे उसके मार्जिन का लगभग 94% हिस्सा ख़त्म हो जाता है।
नया UPI MDR ढाँचा क्या है
NPCI ने चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेन-देन के लिए संशोधित MDR ढाँचा पेश किया है। 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के P2M UPI लेन-देन पर 0.4% MDR लगेगा, जबकि आम उपभोक्ताओं के खुदरा भुगतान मुफ़्त रहेंगे। ₹2,000 तक के UPI लेन-देन पर कोई MDR नहीं है। ₹75,000 और उससे ऊपर के लेन-देन पर MDR की सीमा ₹300 है। चुनिंदा ज़रूरी क्षेत्रों में ₹5 का फ़्लैट शुल्क है, पूँजी बाज़ार के भुगतान पर 0.02% और हर महीने ₹1 लाख तक पाने वाले व्यापारी छूट में हैं। सरकार का दावा है कि क़रीब 96% व्यापारिक लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अदालत में चुनौती
इस ढाँचे के ख़िलाफ़ एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में केंद्र, RBI, NPCI और UPI व सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष ने इस पर भी सवाल उठाया है कि RuPay डेबिट कार्ड को बिना किसी सीमा के “नो-चार्ज” संरक्षण मिलता है, जबकि UPI पर ₹2,000 से ऊपर शुल्क लग रहा है।
किस पर कितना असर
Pneucons जैसी कंपनियों के लिए, जिनका कमीशन कम और ऑर्डर वैल्यू बड़ी होती है, MDR का असर सबसे तीखा हो सकता है। छोटे मार्जिन वाले B2B कारोबार में UPI से भुगतान लेने की लागत कमीशन के लगभग बराबर बन जाती है। ग्राहकों को अब NEFT, RTGS या कार्ड जैसे दूसरे विकल्प चुनने पड़ सकते हैं।
ध्यान देने की बात
ऊपर की रक़में कंपनी के बताए उदाहरण पर आधारित हैं। असल MDR किस रक़म (GST सहित या GST के बिना) पर लगेगा और किन लेन-देन पर लागू होगा, यह NPCI की अधिसूचना से पक्का कर लें।
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