कैंसर के इलाज में बड़ी उम्मीद: मरीज के ट्यूमर के हिसाब से तैयार होगी वैक्सीन, मेलेनोमा की वापसी का खतरा घटा

नई दिल्ली। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तैयार की गई एमआरएनए कैंसर वैक्सीन ने मेलेनोमा यानी त्वचा के एक गंभीर कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को कम करने में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। यह सफलता कैंसर के इलाज को मरीज के ट्यूमर की आनुवंशिक विशेषताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

मरीज के कैंसर के हिसाब से तैयार होती है वैक्सीन

इस नई तकनीक की खासियत यह है कि इसमें सभी मरीजों को एक जैसी ji वैक्सीन नहीं दी जाती। मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेकर उसकी आनुवंशिक संरचना का विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद कैंसर कोशिकाओं में मौजूद ऐसे विशेष बदलावों की पहचान की जाती है, जिन्हें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली निशाना बना सकती है।

इन्हीं बदलावों यानी नियोएंटीजन के आधार पर मरीज के लिए व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन तैयार की जाती है। वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उनके खिलाफ प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित करने का काम करती है।

मेलेनोमा की वापसी रोकने में दिखा असर

मॉडर्ना और मर्क द्वारा विकसित व्यक्तिगत वैक्सीन इंटिसमेरान का अध्ययन लगभग 1,100 ऐसे मरीजों पर किया गया, जिन्हें उन्नत मेलेनोमा का ट्यूमर सर्जरी से पूरी तरह निकालने के बाद इलाज दिया गया था। अध्ययन में वैक्सीन को पेम्ब्रोलिजुमैब नामक इम्यूनोथेरेपी दवा के साथ इस्तेमाल किया गया और इसकी तुलना केवल पेम्ब्रोलिजुमैब लेने वाले मरीजों से की गई।

कंपनियों के अनुसार, वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी का संयोजन लेने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा लौटने से पहले का समय अधिक रहा। यह एमआरएनए आधारित व्यक्तिगत कैंसर वैक्सीन के लिए लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल में सामने आए महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है।

शरीर की इम्यूनिटी को कैंसर पहचानना सिखाएगी वैक्सीन

सामान्य वैक्सीन की तरह यह कैंसर से पहले से बचाव के लिए दी जाने वाली वैक्सीन नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे मरीजों में कैंसर की वापसी को रोकने में मदद करना है, जिनका ट्यूमर पहले ही सर्जरी से निकाला जा चुका है।

वैक्सीन शरीर को कैंसर कोशिकाओं में मौजूद विशिष्ट संकेतों को पहचानने के लिए तैयार करती है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली भविष्य में उन्हीं विशेषताओं वाली कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए बेहतर तरीके से सक्रिय हो सकती है।

अभी इलाज आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं

वैज्ञानिकों के लिए यह परिणाम उत्साहजनक जरूर है, लेकिन इसे अभी सामान्य कैंसर इलाज के रूप में उपलब्ध मानना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक मरीजों को लंबे समय त8îmक निगरानी में रखना जरूरी होगा ताकि यह पता चल सके कि इस उपचार से सिर्फ कैंसर की वापसी का जोखिम कम होता है या मरीजों की कुल जीवन अवधि भी बढ़ती है।

व्यक्तिगत वैक्सीन बनाने में भी समय और अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत होती है। मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेने, आनुवंशिक बदलावों की पहचान करने और उसके आधार पर वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है। शोध में एआई तकनीक का इस्तेमाल भी ऐसे नियोएंटीजन चुनने में किया जा रहा है, जो मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।

कैंसर के इलाज में व्यक्तिगत चिकित्सा का बढ़ता दौर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के परिणाम पर्सनलाइज्ड कैंसर ट्रीटमेंट को आगे बढ़ा सकते हैं। भविष्य में मरीज के कैंसर की आनुवंशिक विशेषताओं के आधार पर उसके लिए अलग वैक्सीन या उपचार तैयार करने की संभावना बढ़ रही है।

हालांकि, इस तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले इसकी प्रभावशीलता, सुरक्षा, लागत और वैक्सीन तैयार करने में लगने वाले समय जैसे पहलुओं पर और अध्ययन जरूरी हैं।

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