त्विषा शर्मा केस: गिरिबाला सिंह की जमानत पर 15 अक्टूबर को होगी अंतिम सुनवाई, दहेज मृत्यु के एंगल पर CBI की जांच जारी

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद तारीख तय, CBI ने दहेज मृत्यु से जुड़ी धारा हटाई लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप बरकरार

भोपाल। मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अब 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे अंतिम सुनवाई होगी। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत याचिका से जुड़े पक्षों को सुना और अगली तारीख निर्धारित की।

मामले में इससे पहले यह जानकारी सामने आई थी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच के दौरान दहेज की मांग से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दहेज अधिनियम की धाराओं को हटा दिया है। हालांकि, इससे त्विषा शर्मा की मौत से जुड़े पूरे मामले में गिरिबाला सिंह को क्लीन चिट नहीं मिली है। उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोप की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

कोर्ट ने दहेज मृत्यु वाले आरोप को लेकर क्या कहा?

गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया था कि CBI ने दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को अपनी जांच से हटा दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने इस दावे को उस रूप में स्वीकार नहीं किया कि CBI ने पूरे दहेज मृत्यु एंगल की जांच ही बंद कर दी है।

मामले में आरोपों की स्थिति जांच के दौरान बदली है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार CBI की चार्जशीट में BNS की धारा 80(2) से संबंधित दहेज मृत्यु के आरोप को हटाकर BNS की धारा 108, यानी आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोप को शामिल किया गया है।

इसलिए दहेज एक्ट की धाराएं हटने को पूरे केस से राहत या मामले के समाप्त होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। त्विषा की मौत से जुड़े अन्य आरोप और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी हैं।

15 अक्टूबर को जमानत पर होगा फैसला?

गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में अब अंतिम सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे का समय निर्धारित किया गया है।

इस सुनवाई में बदली हुई धाराओं और CBI की जांच के आधार पर दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे। इसके बाद अदालत गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर निर्णय ले सकती है।

इससे पहले 30 सितंबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह के वकील को बदली हुई आरोप स्थिति के अनुरूप जमानत याचिका में संशोधन करने का निर्देश दिया था। उस समय अगली सुनवाई 8 अक्टूबर के लिए तय की गई थी।

12 मई को ससुराल में हुई थी त्विषा की मौत

त्विषा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच में उनकी मौत को लेकर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई गंभीर आरोप सामने आए थे।

मामले में त्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह, जो पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं, को आरोपी बनाया गया।

शुरुआत में स्थानीय स्तर पर जांच के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की और घटनाक्रम को समझने के लिए क्राइम सीन का रीक्रिएशन भी किया था।

गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पहले हो चुकी थी रद्द

मामले की शुरुआती कानूनी प्रक्रिया में गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। बाद में इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने मई 2026 में उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद गिरिबाला सिंह ने नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया। इसी जमानत याचिका पर अब हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई होनी है।

समर्थ सिंह की डिफॉल्ट बेल भी हो चुकी है खारिज

इसी मामले में त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह की डिफॉल्ट बेल याचिका भी चर्चा में रही है। अक्टूबर की शुरुआत में अदालत ने उनकी डिफॉल्ट बेल याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि CBI ने निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया था, इसलिए उन्हें डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं बनता।

अब मामले में गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या दहेज का आरोप पूरी तरह खत्म हो गया?

CBI की जांच के दौरान दहेज की मांग से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई और संबंधित दहेज एक्ट की धाराओं को हटाया गया। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि त्विषा शर्मा की मौत से जुड़ी पूरी जांच समाप्त हो गई है।

मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोप सहित अन्य कानूनी पहलुओं पर प्रक्रिया जारी है। इसलिए 15 अक्टूबर की हाईकोर्ट सुनवाई इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बदले हुए आरोपों और CBI की जांच के आधार पर हाईकोर्ट गिरिबाला सिंह को नियमित जमानत देता है या नहीं।

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