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Artemis Temple: प्राचीन दुनिया का वो अजूबा, जिसे आग ने किया तबाह, फिर भी बना इतिहास का सबसे भव्य मंदिर…

प्राचीन दुनिया के सात अजूबों की कहानी में अगला नाम इफिसस के आर्टेमिस मंदिर का आता है।

by desk

Ephesus Artemis Temple: प्राचीन दुनिया के सात अजूबों की कहानी में अगला नाम इफिसस के आर्टेमिस मंदिर का आता है। वर्तमान तुर्की में स्थित यह मंदिर देवी आर्टेमिस को समर्पित था और अपनी विशालता, संगमरमर की वास्तुकला तथा शानदार मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध था। खास बात यह है कि इस स्थान पर समय-समय पर कई मंदिर बनाए गए और सबसे प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ। यह मंदिर बाद में आग और हमलों से नष्ट हुआ, लेकिन इसकी प्रसिद्धि हजारों साल बाद भी कायम है। आज इसके केवल कुछ अवशेष ही दिखाई देते हैं, फिर भी इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए यह प्राचीन यूनानी वास्तुकला की महत्वपूर्ण कड़ी है।

कहां स्थित था आर्टेमिस का मंदिर?

आर्टेमिस का मंदिर प्राचीन Ephesus (इफिसस) शहर में स्थित था। यह क्षेत्र आज तुर्की के पश्चिमी हिस्से में Selçuk के पास है। प्राचीन काल में Ephesus व्यापार, संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

मंदिर को Artemis देवी को समर्पित किया गया था। यूनानी धार्मिक परंपरा में Artemis को शिकार, प्रकृति और वन्यजीवन से जोड़ा जाता था। हालांकि Ephesus में पूजी जाने वाली Artemis का स्वरूप स्थानीय अनातोलियन धार्मिक परंपराओं से भी प्रभावित था।

कब और किसने बनवाया था?

मंदिर के इतिहास को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यहां एक ही मंदिर नहीं बना था। इस स्थान पर पहले भी धार्मिक संरचनाएं मौजूद थीं।

सबसे प्रसिद्ध विशाल मंदिर का निर्माण लगभग 550 ईसा पूर्व के आसपास हुआ माना जाता है। इसके निर्माण को Lydian राजा Croesus (क्रोएसस) के संरक्षण से जोड़ा जाता है। प्राचीन स्रोतों में वास्तुकार Chersiphron और उनके पुत्र Metagenes के नाम भी मिलते हैं।

यह मंदिर मुख्य रूप से संगमरमर से बनाया गया था और इसमें विशाल स्तंभों का इस्तेमाल हुआ था।

कैसा था मंदिर का स्वरूप?

प्राचीन विवरणों के मुताबिक मंदिर बेहद विशाल था। इसमें लगभग 127 स्तंभ होने की बात कही गई है और कई स्तंभ करीब 18 मीटर ऊंचे बताए जाते हैं।

मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर शानदार नक्काशी और मूर्तिकला की गई थी। विशाल संगमरमर की संरचना और कलात्मक सजावट ने इसे उस समय के सबसे प्रभावशाली धार्मिक भवनों में शामिल कर दिया था।

356 ईसा पूर्व में आग ने बदल दिया इतिहास

आर्टेमिस मंदिर के इतिहास की सबसे चर्चित घटना 356 ईसा पूर्व की है। इसी साल मंदिर में आग लगा दी गई।

प्राचीन स्रोतों के अनुसार आग लगाने वाला व्यक्ति Herostratus (हेरोस्ट्रेटस) था। बताया जाता है कि वह ऐसा काम करके अपना नाम इतिहास में दर्ज कराना चाहता था।

उसकी इच्छा विडंबनापूर्ण तरीके से पूरी हुई—आज हजारों साल बाद भी उसका नाम इसी घटना के कारण इतिहास में दर्ज है।

आग से मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन इसके बाद इसे फिर से बनाया गया।

दोबारा बना तो पहले से भी भव्य

मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया और बाद का मंदिर पहले से भी अधिक भव्य माना जाता है। इसी बाद के मंदिर की भव्यता ने इसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में विशेष स्थान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

इसमें विशाल संगमरमर के स्तंभ, मूर्तियां और सजावटी वास्तुकला शामिल थी।

किसने बताया कि यह दुनिया का अजूबा है?

आर्टेमिस मंदिर को किसी आधुनिक सरकार या UNESCO ने “दुनिया का सातवां अजूबा” घोषित नहीं किया था।

प्राचीन यूनानी यात्रियों और लेखकों की परंपरा में दुनिया की सबसे अद्भुत और देखने योग्य संरचनाओं की सूचियां बनाई जाती थीं। बाद में Antipater of Sidon की लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की प्रसिद्ध सूची में Temple of Artemis at Ephesus को सात अजूबों में शामिल किया गया।

इस सूची का आधार आधुनिक प्रतियोगिता जैसा मतदान नहीं था, बल्कि उस समय की दुनिया में प्रसिद्ध और असाधारण निर्माणों की प्रतिष्ठा थी।

हमें मंदिर के बारे में जानकारी कैसे मिली?

आर्टेमिस मंदिर के बारे में जानकारी कई प्राचीन लेखकों के विवरणों से मिलती है। इनमें Herodotus, Pliny the Elder और Pausanias जैसे नाम महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा आधुनिक पुरातत्व से मंदिर की नींव, स्तंभों और वास्तुशिल्प के कई अवशेष मिले हैं। इन सभी प्रमाणों को मिलाकर इतिहासकार मंदिर के स्वरूप और उसके इतिहास को समझते हैं।

मंदिर आखिर नष्ट कैसे हुआ?

356 ईसा पूर्व की आग के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था, लेकिन इसका अस्तित्व ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रह सका।

बाद के रोमन काल में Ephesus में ईसाई धर्म का प्रभाव बढ़ा और Artemis की पूजा का महत्व कम होता गया। तीसरी शताब्दी ईस्वी में Goths के हमलों से मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा।

इसके बाद मंदिर धीरे-धीरे उजड़ गया और इसके पत्थरों का इस्तेमाल आसपास की दूसरी इमारतों में भी किया गया।

19वीं सदी में फिर खोजा गया मंदिर

लगभग 1,500 साल बाद आधुनिक पुरातत्वविदों ने इस खोए हुए अजूबे की खोज शुरू की।

ब्रिटिश इंजीनियर और पुरातत्व खोजकर्ता John Turtle Wood ने Ephesus में लंबे समय तक खुदाई की। 1869 में उन्हें Artemis Temple के अवशेषों का पता लगाने में सफलता मिली।

बाद में यहां लगातार पुरातात्विक शोध और खुदाई हुई, जिससे प्राचीन मंदिर की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।

आज क्या बचा है?

आज उस विशाल मंदिर का केवल छोटा हिस्सा ही दिखाई देता है। यहां मंदिर की नींव, पत्थरों के अवशेष और कुछ पुनर्निर्मित स्तंभ देखे जा सकते हैं।

इसके बावजूद यह स्थान प्राचीन दुनिया की वास्तुकला और धार्मिक इतिहास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

Ephesus को 2015 में UNESCO World Heritage List में शामिल किया गया था।

Artemis Temple की पूरी टाइमलाइन

– लगभग 7वीं–6वीं शताब्दी ईसा पूर्व: इस स्थान पर बड़े धार्मिक निर्माणों का विकास।
– लगभग 550 ईसा पूर्व: विशाल मंदिर का निर्माण।
– 356 ईसा पूर्व: Herostratus द्वारा मंदिर में आग लगाए जाने का उल्लेख।
– इसके बाद: मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण।
– दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास: Seven Wonders की प्रसिद्ध परंपरा में शामिल।
– तीसरी शताब्दी ईस्वी: Goths के हमले से भारी नुकसान।
– बाद की सदियां: मंदिर उजड़ता गया और इसके पत्थरों का अन्य निर्माणों में इस्तेमाल हुआ।
– 1869: John Turtle Wood द्वारा मंदिर के अवशेषों की खोज।
– 2015: Ephesus UNESCO World Heritage Site में शामिल।

क्यों खास था आर्टेमिस मंदिर?

आर्टेमिस मंदिर की कहानी सिर्फ एक विशाल मंदिर की कहानी नहीं है। यह निर्माण, विनाश और पुनर्निर्माण की कहानी है। जिस मंदिर को आग ने तबाह कर दिया था, उसे दोबारा पहले से अधिक भव्य बनाया गया। बाद में युद्धों, धार्मिक बदलाव और समय के कारण वह फिर नष्ट हो गया।

आज मंदिर का अधिकांश हिस्सा गायब है, लेकिन इसके अवशेष यह बताते हैं कि लगभग ढाई हजार साल पहले इंसान कितनी विशाल और कलात्मक संरचनाएं बनाने में सक्षम था।

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