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रक्षाबंधन 2026: कैसे शुरू हुई भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के इस पर्व की परंपरा? जानें इतिहास और महत्व

by desk

रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी वजह से इसे श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती है।

इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, भाई के माथे पर तिलक लगाती है और उसके सुख-समृद्धि की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हुए उसे उपहार देता है।

रक्षाबंधन की शुरुआत कैसे हुई?

रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर एक ही ऐतिहासिक घटना को प्रमाणित रूप से इसका जन्मस्थान नहीं माना जाता। इसके पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं।

1. श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा

महाभारत से जुड़ी लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, जब श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगी तो द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक टुकड़ा बांध दिया। कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया। हालांकि यह कथा रक्षाबंधन की ऐतिहासिक शुरुआत का प्रमाण नहीं है, लेकिन भाई-बहन जैसे स्नेह और रक्षा के भाव से इसे जोड़ा जाता है।

2. इंद्र और इंद्राणी की कथा

एक अन्य पौराणिक मान्यता में देवासुर संग्राम के दौरान इंद्र की पत्नी इंद्राणी द्वारा इंद्र की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधने का उल्लेख मिलता है। इसे भी रक्षा-सूत्र की प्राचीन परंपरा से जोड़ा जाता है।

3 ऐतिहासिक परंपराएं

मध्यकालीन भारत में भी राखी या रक्षा-सूत्र को सुरक्षा और सामाजिक संबंधों के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाने के उल्लेख मिलते हैं। हालांकि लोकप्रिय कहानियों और ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों में अंतर रखना जरूरी है।

रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं?

रक्षाबंधन का मूल भाव स्नेह, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे की जिम्मेदारी से जुड़ा है। समय के साथ इसका स्वरूप भी व्यापक हुआ है। आज कई जगह भाई-बहन के अलावा परिवार और समाज में प्रेम एवं सुरक्षा के प्रतीक के रूप में भी रक्षा-सूत्र बांधा जाता है।

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