Colossus of Rhodes: प्राचीन दुनिया के सात अजूबों की श्रृंखला में अगला नाम रोड्स के कोलोसस का है। यूनान के रोड्स द्वीप पर बनाई गई यह विशाल कांस्य प्रतिमा प्राचीन काल की सबसे प्रभावशाली मूर्तियों में गिनी जाती थी। इसका निर्माण सूर्य देव Helios के सम्मान में रोड्स के लोगों ने अपनी सैन्य विजय की याद में कराया था। माना जाता है कि प्रसिद्ध मूर्तिकार Chares of Lindos ने लगभग 292 ईसा पूर्व में इसका निर्माण शुरू किया और करीब 12 वर्षों बाद इसे पूरा किया। लगभग 30–33 मीटर ऊंची इस प्रतिमा को बनाने में कांस्य और लोहे का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि यह अजूबा ज्यादा समय तक खड़ा नहीं रह सका। लगभग 226 ईसा पूर्व में आए शक्तिशाली भूकंप के कारण प्रतिमा टूटकर गिर गई। इसके बावजूद सदियों तक इसका नाम प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में शामिल रहा।
कहां स्थित था Colossus of Rhodes?
रोड्स का कोलोसस Rhodes Island के Rhodes शहर में स्थित था। यह द्वीप भूमध्य सागर में स्थित है और प्राचीन काल में व्यापार तथा समुद्री गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था।
हालांकि आज तक यह निश्चित रूप से पता नहीं चल पाया है कि प्रतिमा शहर के किस सटीक स्थान पर खड़ी थी।
क्यों बनवाई गई थी विशाल प्रतिमा?
Colossus की कहानी एक युद्ध से जुड़ी है।
लगभग 305–304 ईसा पूर्व में मैसेडोनिया के शासक Demetrius I की सेना ने Rhodes शहर की घेराबंदी की थी। रोड्स के लोगों ने इस हमले का सफलतापूर्वक सामना किया।
जीत के बाद उन्होंने अपनी विजय के सम्मान में और अपने संरक्षक देवता Helios को समर्पित करते हुए एक विशाल प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया।
इस तरह Colossus धार्मिक आस्था और सैन्य विजय दोनों का प्रतीक बन गया।
किसने बनाया था Colossus?
इस विशाल प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध यूनानी मूर्तिकार Chares of Lindos ने किया था।
निर्माण लगभग 292 ईसा पूर्व में शुरू हुआ और करीब 280 ईसा पूर्व में पूरा हुआ।
यानी इसे बनाने में लगभग 12 साल लगे।
कितनी ऊंची थी प्रतिमा?
प्राचीन स्रोतों के आधार पर इसकी ऊंचाई लगभग 30 से 33 मीटर मानी जाती है।
यह उस समय की दुनिया की सबसे ऊंची और विशाल प्रतिमाओं में से एक थी। इसके निर्माण में लोहे के ढांचे पर कांस्य की प्लेटों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना बताई जाती है।
क्या प्रतिमा बंदरगाह के दोनों किनारों पर खड़ी थी?
Colossus की सबसे प्रसिद्ध तस्वीर में इसे Rhodes के बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर दोनों पैरों को फैलाकर खड़ा दिखाया जाता है और जहाज उसके पैरों के नीचे से गुजरते हैं। लेकिन इतिहासकारों के अनुसार यह चित्रण संभवतः बाद की कल्पना है। ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि प्रतिमा बंदरगाह के दोनों किनारों पर खड़ी थी। इसका वास्तविक स्थान आज भी निश्चित नहीं है।
किसने इसे दुनिया का अजूबा बताया?
प्राचीन काल में किसी आधुनिक संस्था ने इसे “अजूबा” घोषित नहीं किया था। यूनानी यात्रियों और लेखकों ने अपने समय की असाधारण संरचनाओं का वर्णन किया। बाद में Antipater of Sidon की लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की प्रसिद्ध Seven Wonders सूची में Colossus of Rhodes को भी शामिल किया गया। बाद में Pliny the Elder जैसे लेखकों ने भी इसकी विशालता का उल्लेख किया।
भूकंप ने कैसे किया तबाह?
Colossus का निर्माण लगभग 280 ईसा पूर्व में पूरा हुआ था, लेकिन यह लंबे समय तक खड़ी नहीं रह सकी। लगभग 226 ईसा पूर्व में Rhodes में एक शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप के कारण प्रतिमा टूटकर जमीन पर गिर गई। यानी निर्माण के लगभग 50–55 साल बाद ही यह विशाल अजूबा नष्ट हो गया।
टूटने के बाद दोबारा क्यों नहीं बनाया गया?
प्रतिमा को दोबारा खड़ा करने की कोशिश नहीं की गई। प्राचीन परंपराओं के अनुसार मिस्र के शासक Ptolemy III ने इसे फिर से बनाने में मदद की पेशकश की थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। हालांकि इस कहानी के सभी विवरणों को इतिहासकार पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं मानते।
आज Colossus का क्या बचा है?
आज मूल प्रतिमा मौजूद नहीं है। इसके विशाल अवशेष भी निश्चित रूप से पहचान में नहीं आते। समय के साथ कांस्य और अन्य धातुओं के दोबारा इस्तेमाल की संभावना जताई जाती है। इसी वजह से आज Colossus के बारे में हमारी जानकारी मुख्य रूप से प्राचीन लेखकों के विवरण और पुरातात्विक अध्ययन पर आधारित है।
Colossus की सबसे बड़ी खासियत क्या थी?
इसकी सबसे बड़ी विशेषता थी उसका विशाल आकार और कांस्य निर्माण। लगभग 30 मीटर से अधिक ऊंची प्रतिमा को उस समय के सीमित साधनों से बनाना अपने आप में बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि थी इसी असाधारण आकार और कलात्मकता के कारण इसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में जगह मिली।
Colossus of Rhodes: पूरी टाइमलाइन
– 305–304 ईसा पूर्व: Rhodes की घेराबंदी।
– लगभग 292 ईसा पूर्व: Colossus का निर्माण शुरू।
– लगभग 280 ईसा पूर्व: निर्माण पूरा।
– लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व: Seven Wonders की प्रसिद्ध सूची में शामिल।
– लगभग 226 ईसा पूर्व: भूकंप में प्रतिमा गिर गई।
– बाद की सदियां: इसके अवशेषों के बारे में अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण सामने आए।
– आज: मूल प्रतिमा नष्ट है और इसका सटीक स्थान भी पूरी तरह निश्चित नहीं है।