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पेरिमेनोपॉज़ के लक्षणों से मिल सकती है राहत, नियमित एक्सरसाइज से हॉट फ्लैश, चिंता और पेशाब की समस्याओं में हो सकता है सुधार

नई स्टडी में शारीरिक गतिविधियों के संभावित फायदे सामने आए, महिलाओं के लिए मेनोपॉज़ से पहले का समय स्वास्थ्य के लिहाज से अहम

by desk

महिलाओं के जीवन में 40 की उम्र के आसपास या उससे पहले भी हार्मोनल बदलाव शुरू हो सकते हैं। इस अवधि को पेरिमेनोपॉज़ कहा जाता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कई तरह के शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक गर्मी महसूस होना यानी हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना, चिंता, नींद में परेशानी और पेशाब से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।

हालिया स्टडी के मुताबिक, अधिक नियमित शारीरिक गतिविधियां इन लक्षणों में राहत दिलाने में मददगार हो सकती हैं। इससे पेरिमेनोपॉज़ के दौर से गुजर रही महिलाओं के लिए व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली का महत्व एक बार फिर सामने आया है। हालांकि, स्टडी के निष्कर्षों को समझने के लिए उसके शोध-तरीके और प्रतिभागियों से जुड़े विवरण देखना जरूरी है।

क्या हैं पेरिमेनोपॉज़ के प्रमुख लक्षण?

पेरिमेनोपॉज़, मेनोपॉज़ से पहले का संक्रमणकाल है। इस दौरान मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और हार्मोनल बदलावों के कारण अलग-अलग महिलाओं में अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इसके प्रमुख लक्षण हैं:

– अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना और हॉट फ्लैश आना।

– रात में पसीना आना और नींद प्रभावित होना।

– बेचैनी, चिंता और मूड में बदलाव।

– बार-बार पेशाब आने की समस्या।

– पेशाब पर नियंत्रण रखने में परेशानी या अचानक तेज इच्छा होना।

– थकान और एकाग्रता में कमी महसूस होना।

हर महिला में इन लक्षणों की तीव्रता एक जैसी नहीं होती। कुछ महिलाओं को हल्की परेशानी होती है, जबकि कुछ के दैनिक जीवन पर इसका अधिक असर पड़ सकता है।

किस तरह की एक्सरसाइज हो सकती है फायदेमंद?

पेरिमेनोपॉज़ के दौरान अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधियां करना उपयोगी हो सकता है। इसके लिए शुरुआत में बहुत कठिन व्यायाम करना जरूरी नहीं है।

1. तेज चाल से पैदल चलना: रोजाना 20 से 30 मिनट पैदल चलने से शारीरिक सक्रियता बढ़ सकती है और मानसिक स्वास्थ्य को भी लाभ मिल सकता है।

2. योग और सांस संबंधी अभ्यास: योग तथा धीमी, नियंत्रित सांस लेने के अभ्यास तनाव और चिंता को संभालने में मदद कर सकते हैं।

3. हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने और उम्र के साथ होने वाले शारीरिक बदलावों से निपटने के लिए हल्के वजन वाले व्यायाम उपयोगी हो सकते हैं।

4. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज: सही तरीके से किए गए पेल्विक फ्लोर व्यायाम कुछ महिलाओं में पेशाब के रिसाव जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

क्या सिर्फ एक्सरसाइज से दूर हो जाएंगे सभी लक्षण?

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इससे पेरिमेनोपॉज़ के सभी लक्षण पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। हॉट फ्लैश जैसे लक्षणों पर व्यायाम का असर हर महिला में अलग हो सकता है।

यदि लक्षण गंभीर हैं, नींद लगातार प्रभावित हो रही है या पेशाब संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हार्मोनल या गैर-हार्मोनल उपचार के विकल्प भी सुझा सकते हैं।

महिलाओं के लिए क्या है जरूरी सलाह?

पेरिमेनोपॉज़ एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, कोई बीमारी नहीं। इस दौरान संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाली महिलाओं को हल्की गतिविधियों से शुरुआत करनी चाहिए और धीरे-धीरे व्यायाम बढ़ाना चाहिए।

नियमित एक्सरसाइज पेरिमेनोपॉज़ के दौरान शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, हॉट फ्लैश, चिंता और पेशाब संबंधी लक्षणों में राहत की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए स्वस्थ दिनचर्या के साथ जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है।

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