जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बुधवार, 23 सितंबर को लद्दाख में 20 किलोमीटर की प्रतीकात्मक मार्च निकाल रहे हैं। यह मार्च लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय दिए जाने की मांग को फिर से जोर देने के लिए है, जो बातचीत के एक और साल बेनतीजा रहने के बाद हो रही है।
एक साल पहले क्या हुआ था
24 सितंबर 2025 को लेह में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 4 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। वांगचुक के कार्यालय के मुताबिक इन चार मारे गए लोगों की याद में गुरुवार, 24 सितंबर को “शहीद दिवस” मनाया जाएगा।
वांगचुक की गिरफ्तारी और रिहाई
उन घटनाओं के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा, जिसमें कथित तौर पर अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देना भी शामिल था। करीब छह महीने हिरासत में रहने के बाद मार्च 2026 में सरकार ने “सभी पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद” की जरूरत बताते हुए उनकी हिरासत वापस ले ली। यह रिहाई ठीक उसी समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट को उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करनी थी।
मुआवजे पर नाराजगी
लद्दाख प्रशासन ने मारे गए हर व्यक्ति के परिवार को 15 लाख रुपये और घायलों को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वांगचुक ने इस राशि को नाकाफी बताते हुए कहा था कि यह मुआवजा देखकर वे खुश नहीं, बल्कि शर्मिंदा हैं। लद्दाख के नेताओं ने परिवारों के लिए ज्यादा मुआवजे और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले वापस लेने की भी मांग की है।
बातचीत अब भी अधूरी
लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच संवैधानिक सुरक्षा उपायों और निर्वाचित शासन ढांचे को लेकर बातचीत लगातार जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। दरअसल लद्दाख के नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद 19 से 24 सितंबर तक आंदोलन का ऐलान किया था, लेकिन मौसम की खराब स्थिति का हवाला देते हुए इस कार्यक्रम को बाद में रद्द कर दिया गया था।
पहले भी निकाल चुके हैं लंबी मार्च
वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख की मांगों को लेकर कई भूख हड़तालें और लंबी पैदल मार्च निकाल चुके हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने 35 दिन की भूख हड़ताल शुरू की थी, जो लेह में हिंसा भड़कने के बाद बीच में ही रोकनी पड़ी थी। उस हिंसा के चलते कर्फ्यू लगाया गया और 50 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था।
आगे क्या
23 किलोमीटर की यह मार्च पहले प्रस्तावित एक लंबे आंदोलन कार्यक्रम का छोटा रूप है। लद्दाख के नेता अब भी राज्य के दर्जे, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों और चुनी हुई शासन व्यवस्था की मांग पर अड़े हैं।
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